राजस्थान नॉइज़ कंट्रोल एक्ट, 1963 — विस्तृत ब्लॉग

 

📢 राजस्थान नॉइज़ कंट्रोल एक्ट, 1963 — विस्तृत ब्लॉग 

प्रस्तावना

Rajasthan Noises Control Act, 1963 (अधिनियम संख्या 12 / 1963) राजस्थान राज्य में शोर (Noise) के नियंत्रण हेतु बनाया गया कानून है। यह अधिनियम राज्य सरकार को अधिकार देता है कि वह लोक जनकल्याण और शांति बनाए रखने के लिए “नॉइडल आवाज़ें (Nocturnal Noise)” पर प्रतिबंध लगा सके। 


सेक्शन-वाइज (विस्तृत) विश्लेषण

Section 1 — नाम, विस्तार, प्रारंभ और लागू करना

  • यह अधिनियम पूरे राजस्थान राज्य में लागू है।

  • अधिनियम के कुछ सेक्शन तुरंत लागू होते हैं, जबकि अन्य सेक्शन विभिन्न क्षेत्रों में राज्य सरकार की अधिसूचना के बाद लागू किए जाते हैं। 


Section 2 — परिभाषाएँ (Definitions)

  • “Loud-speaker” या “Sound Amplifier” की परिभाषा: ऐसा यंत्र जो आवाज़ को बढ़ाता है। 

  • “Public place” की परिभाषा: सड़क, स्ट्रीट, अन्य सार्वजनिक स्थान जहाँ जनता का आवागमन होता हो। 


Section 3 — रात की शोर (Nocturnal Noise) की घोषणा और प्रतिबंध

-मुख्य अधिकारी (जिलाधिकारी या अन्य अधिकृत अधिकारी) नोटिस जारी कर किसी क्षेत्र में रात के समय उत्पन्न होने वाली आवाज़ों को “Nocturnal Noise” घोषित कर सकते हैं। 

  • ऐसे घोषित शोर को वर्जित (प्रतिकर) किया जा सकता है। 


Section 4 — लाउडस्पीकर / साउंड एम्प्लीफायर का उपयोग प्रतिबंध

  • अस्पताल, स्कूल, होस्टल, कोर्ट जैसी संवेदनशील जगहों से एक निर्धारित दूरी के भीतर लाउडस्पीकर का उपयोग प्रतिबंधित। 

  • 11 बजे रात से 5 बजे सुबह तक बिना अनुमति के सार्वजनिक स्थानों में लाउडस्पीकर चलाना मना है। 


Section 5 — किसी भी समय किसी भी स्थान पर शोर को रोकने का अधिकार

  • जिला मजिस्ट्रेट या अन्य अधिकृत अधिकारी यह आदेश दे सकते हैं कि किसी स्थान या समय पर किसी प्रकार की ध्वनि (Noise) पूरी तरह निषिद्ध हो जाए, यदि सार्वजनिक हित में इसकी आवश्यकता हो। 


Section 6 — दंड (Penalties)

  • पहली बार दोष सिद्ध होने पर जुर्माना ₹250 तक हो सकता है। 

  • पुनरावृत्ति पर 1 महीने तक जेल या फिर जुर्माना या दोनों में से कोई दंड हो सकता है। 


Section 7 — Verfahren / प्रक्रिया (Procedure)

  • इस अधिनियम के अंतर्गत किया गया अपराध प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा सुनाया जा सकता है। 

  • यह अपराध Cognizable (गिरफ़्तारी योग्य) और Bailable (जमानत योग्य) है।


Section 8 — पुलिस को गिरफ्तारी की शक्ति

  • सब-इंस्पेक्टर या उससे ऊपर की रैंक का पुलिस अधिकारी इस अधिनियम का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को गिरफ़्तार कर सकता है, जैसे कि वह संज्ञेय अपराध हो। 


Section 9 — नियम बनाने की शक्ति

  • राज्य सरकार नियम बना सकती है ताकि अधिनियम के उद्देश्य लागू हो सकें। 

  • वास्तविक “Rajasthan Noises Control Rules, 1964” जारी की गई हैं। 

  • नियमों में, जैसे कि धारा 4 में दूरी निर्धारित की गई है — अस्पताल, विद्यालय आदि से लाउडस्पीकर के लिए 150 मीटर की दूरी नियमों में पाई जाती है। 


Section 10 — निरसन (Repeal)

  • इस अधिनियम के लागू होने पर Ajmer Sound Amplifiers Control Act, 1952 और राज्य के अन्य संबंधित कानूनों को समाप्त किया गया था। 


⚖️ लैंडमार्क केस-लॉ (Landmark Judgments)

मैंने कानूनी डेटाबेस और प्रमुख स्रोतों में गहन खोज की है, लेकिन कोई सुप्रीम कोर्ट या उच्च न्यायालय द्वारा ‘Rajasthan Noises Control Act, 1963’ के संदर्भ में गैर-सूचित / प्रसिद्ध लीडमार्क फैसला नहीं मिला। यह संभावना है कि:

  1. यह अधिनियम कम न्यायिक विवाद में रहा है

  2. शोर-प्रदूषण मामलों में अधिकतर केस लोकल पुलिस या म्युनिसिपल स्तर पर हल किए गए, जिन्हें उच्च न्यायालय या सुप्रीम कोर्ट तक भी नहीं पहुंचाया गया।

  3. वर्तमान में दिल्ली समेत अन्य राज्यों के Noise Pollution Act / Rules एवं Supreme Court के निर्देश (जैसे “Re: Noise Pollution – Loudspeakers and High Volume Sound Systems” केस, 2005) शोर नियंत्रण के लिए अधिक प्रासंगिक हैं। 


📌 महत्वपूर्ण चुनौतियाँ और व्यावहारिक निष्कर्ष

  • दंड बहुत कम: Act में दंड सीमित है (₹250 और 1 माह जेल), जिससे इसकी प्रभावशीलता सीमित होती है। 

  • लागू करना कठिन: अक्सर पुलिस और स्थानीय प्रशासन लाउड संगीत और नाइट पार्टीज पर कार्रवाई नहीं करते। 

  • नियम अद्यतनीकरण की जरूरत: आधुनिक समय में शोर प्रदूषण बहुत जटिल है (DJ, डीजे पार्टियाँ, बजाने योग्य स्पीकर), पर विधि बहुत पुरानी और पुरातन है।

  • नागरिक जागरूकता कम: बहुत से लोग Act की मौजूदगी और उसकी सीमाओं से अनजान हैं।



📚 निष्कर्ष

Rajasthan Noises Control Act, 1963 शोर-प्रदूषण को नियंत्रित करने की एक पुरानी और विशिष्ट राज्य स्तरीय कानून है, लेकिन इसके दंड और प्रवर्तन की सीमाओं के कारण इसका प्रभाव सीमित रहा है।
संभावना है कि नए पर्यावरण-कानून, शोर नियमों और उच्च न्यायालय/सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को मिलाकर बेहतर शोर नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सकता है।

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