भारत शासन अधिनियम, 1935: महत्वपूर्ण प्रावधान, प्रमुख न्यायिक निर्णय (Landmark Case Laws) एवं उनके संक्षिप्त विवरण सहित

 

भारत शासन अधिनियम, 1935 (Government of India Act, 1935)

महत्वपूर्ण प्रावधान, प्रमुख न्यायिक निर्णय (Landmark Case Laws) एवं उनके संक्षिप्त विवरण सहित


📜 परिचय (Introduction)

भारत शासन अधिनियम, 1935 (Government of India Act, 1935) ब्रिटिश शासनकाल में पारित सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक अधिनियमों में से एक था।
इस अधिनियम ने भारत में संघीय शासन (Federal Government) की नींव रखी, प्रांतीय स्वायत्तता (Provincial Autonomy) को लागू किया, तथा जवाबदेह सरकार (Responsible Government) की दिशा में एक निर्णायक कदम बढ़ाया।

यह अधिनियम आगे चलकर भारत के संविधान, 1950 का मूल आधार बना।
आज भी भारतीय संविधान में कई प्रावधान इस अधिनियम से प्रेरित हैं — जैसे संघीय ढाँचा, लोक सेवा आयोग (Public Service Commission), तथा शक्ति विभाजन (Division of Powers)


🏛️ पृष्ठभूमि (Background)

  • साइमन कमीशन (Simon Commission, 1927) की असफलता और

  • राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस (Round Table Conferences, 1930-32) की सिफारिशों के बाद,
    ब्रिटिश सरकार ने White Paper (1933) प्रस्तुत किया जिसमें भारत के संवैधानिक सुधारों की रूपरेखा दी गई।

इस श्वेत पत्र को ब्रिटिश संसद की संयुक्त समिति (Joint Parliamentary Committee) ने अध्ययन किया और अंततः भारत शासन अधिनियम, 1935 पारित हुआ।


🎯 अधिनियम के प्रमुख उद्देश्य (Main Objectives of the Act)

  1. भारत में उत्तरदायी सरकार (Responsible Government) की स्थापना करना।

  2. भारत में संघीय शासन प्रणाली (Federal System) लागू करना।

  3. प्रांतों को अधिक स्वायत्तता (Provincial Autonomy) देना।

  4. कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के बीच संतुलित ढांचा (Balanced Framework) स्थापित करना।


⚖️ भारत शासन अधिनियम, 1935 के मुख्य प्रावधान (Important Provisions)

1. 🏗️ ऑल इंडिया फेडरेशन (All-India Federation)

  • इस अधिनियम के अनुसार भारत में एक संघीय सरकार (Federation) स्थापित की जानी थी जिसमें —

    • ब्रिटिश प्रांत (Provinces) तथा

    • देशी रियासतें (Princely States)
      शामिल होने थे।

  • लेकिन देशी रियासतों ने शामिल होने से इंकार कर दिया, इसलिए यह संघीय ढाँचा कभी लागू नहीं हो सका।


2. 🧭 शक्ति विभाजन (Division of Powers)

केंद्र और प्रांतों के बीच शक्तियों का विभाजन तीन सूचियों (Three Lists) के माध्यम से किया गया—

  1. संघीय सूची (Federal List) – 59 विषय (रक्षा, विदेश नीति आदि)

  2. प्रांतीय सूची (Provincial List) – 54 विषय (पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि)

  3. समवर्ती सूची (Concurrent List) – 36 विषय (फौजदारी कानून, विवाह आदि)

👉 शेष शक्तियाँ (Residuary Powers) गवर्नर जनरल के अधीन रहीं।


3. 🏛️ प्रांतीय स्वायत्तता (Provincial Autonomy)

  • 1919 के अधिनियम के अंतर्गत लागू द्वैध शासन प्रणाली (Dyarchy) को समाप्त कर दिया गया।

  • प्रांतों को उनके अधिकार क्षेत्र में स्वतंत्रता दी गई।

  • मंत्रियों को प्रांतीय विधानमंडल के प्रति उत्तरदायी (Responsible) बनाया गया।

👉 यह भारत में उत्तरदायी शासन की शुरुआत थी।


4. 🧾 संघीय विधायिका (Federal Legislature)

  • केंद्र स्तर पर द्विसदनीय विधायिका (Bicameral Legislature) स्थापित की गई—

    • राज्य परिषद (Council of State) – 260 सदस्य

    • संघीय सभा (Federal Assembly) – 375 सदस्य

  • कुछ सदस्य निर्वाचित (Elected) और कुछ नामित (Nominated) थे।

  • गवर्नर जनरल को वेटो (Veto) और Ordinance जारी करने की शक्ति दी गई।


5. ⚖️ संघीय न्यायालय की स्थापना (Establishment of Federal Court, 1937)

  • भारत में पहली बार एक संघीय न्यायालय (Federal Court) की स्थापना की गई।

  • इस न्यायालय के पास मूल (Original), अपील (Appellate) और परामर्शात्मक (Advisory) अधिकार क्षेत्र था।
    👉 यह न्यायालय आगे चलकर भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) का आधार बना।


6. 👑 गवर्नर जनरल की शक्तियाँ (Powers of Governor-General)

  • गवर्नर जनरल केंद्र का मुख्य कार्यकारी अधिकारी था।

  • उसके पास निम्नलिखित शक्तियाँ थीं—

    • विधेयकों पर वेटो (Veto Power)

    • Ordinance जारी करने का अधिकार

    • रक्षा व विदेश नीति पर पूर्ण नियंत्रण

👉 इससे स्पष्ट था कि ब्रिटिश सरकार का वास्तविक नियंत्रण बरकरार था।


7. 🪙 भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India)

  • अधिनियम के तहत भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की स्थापना का प्रावधान किया गया।

  • वर्ष 1935 में RBI अस्तित्व में आया।


8. 🧑‍💼 लोक सेवा आयोग (Public Service Commissions)

  • अधिनियम में निम्नलिखित आयोगों का गठन किया गया—

    • संघीय लोक सेवा आयोग (FPSC)

    • प्रांतीय लोक सेवा आयोग (PPSC)

    • संयुक्त लोक सेवा आयोग (JPSC)
      👉 यही प्रणाली आगे चलकर UPSC और State PSCs के रूप में जारी रही।


9. 🗳️ मताधिकार (Franchise)

  • पहली बार लगभग 10% भारतीय जनता को मतदान का अधिकार (Right to Vote) दिया गया।

  • मताधिकार अभी भी आय, संपत्ति और शिक्षा पर आधारित था।


10. ⚙️ भारत परिषद का उन्मूलन (Abolition of Council of India)

  • 1858 से सचिव राज्य को सलाह देने वाली Council of India को समाप्त कर दिया गया।

  • अब सचिव राज्य को केवल कुछ सलाहकारों (Advisors) के साथ कार्य करना था।


📚 प्रमुख न्यायिक निर्णय (Landmark Case Laws)

1. In re: Central Provinces and Berar Act, 1938 (1939)

  • मुद्दा: क्या प्रांतीय विधानमंडल व्यावसायिक वाहनों पर कर लगा सकता है?

  • निर्णय: संघीय न्यायालय ने कहा कि प्रांत केवल प्रांतीय सूची (Provincial List) के विषयों पर कानून बना सकता है।

  • महत्व: इस निर्णय ने केंद्र व प्रांतों के अधिकार क्षेत्र की सीमाएँ स्पष्ट कीं।


2. Emperor v. Benoari Lal Sharma (1945)

  • तथ्य: युद्धकाल के दौरान विशेष न्यायालयों की स्थापना को चुनौती दी गई।

  • मुद्दा: क्या गवर्नर जनरल के आपातकालीन अधिकारों के अंतर्गत यह वैध है?

  • निर्णय: प्रिवी काउंसिल ने विशेष न्यायालयों की वैधता को सही ठहराया।

  • महत्व: गवर्नर जनरल की विशाल शक्तियों को मान्यता दी गई।


3. United Provinces v. Atiqa Begum (1940)

  • तथ्य: प्रांतीय विधानमंडल द्वारा बनाए गए कानून की वैधता पर विवाद था।

  • निर्णय: संघीय न्यायालय ने कहा कि प्रांतों की विधायी शक्तियाँ सीमित हैं।

  • महत्व: इसने संविधान के तहत विधायी अधिकारों की सीमाएँ स्पष्ट कीं।


📈 भारत शासन अधिनियम, 1935 की प्रमुख विशेषताएँ (Key Features)

पहलू1919 का अधिनियम1935 का अधिनियम
शासन प्रणालीद्वैध शासन (Dyarchy)प्रांतीय स्वायत्तता
विधायिकाएक सदनीयद्विसदनीय (Bicameral)
मताधिकारसीमित10% जनसंख्या
संघीय ढाँचानहींप्रस्तावित (लागू नहीं हुआ)
न्यायपालिकाकोई संघीय न्यायालय नहींसंघीय न्यायालय की स्थापना
लोक सेवा आयोगकेवल प्रांतीयसंघीय व प्रांतीय दोनों
वास्तविक शक्तिगवर्नर के पासगवर्नर जनरल के पास

🏁 निष्कर्ष (Conclusion)

भारत शासन अधिनियम, 1935 ब्रिटिश शासन के अधीन सबसे व्यापक और विस्तृत संवैधानिक अधिनियम था।
इसने भारत में संघीय शासन, प्रांतीय स्वायत्तता, और उत्तरदायी सरकार की नींव रखी।

यद्यपि इस अधिनियम के अंतर्गत पूर्ण स्वशासन नहीं मिला, फिर भी इसने भारत को लोकतांत्रिक शासन प्रणाली की दिशा में अग्रसर किया।

👉 भारतीय संविधान, 1950 ने इस अधिनियम से कई विशेषताएँ अपनाईं —
जैसे कि:

  • संघीय ढाँचा

  • लोक सेवा आयोग

  • शक्तियों का विभाजन

  • द्विसदनीय विधायिका

  • आपातकालीन प्रावधान

इस प्रकार, भारत शासन अधिनियम, 1935 भारतीय संविधान का आधार स्तंभ (Foundation Stone) माना जाता है।

Post a Comment

Previous Post Next Post